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Scientist Developed 8 New Varieties Of Coarse Grains Capable Of Withstanding Weather Along With
New Millet Varieties: श्री अन्न की आठ नई किस्में विकसित, सहन कर सकती हैं मौसम की मार, मिलेगा बंपर उत्पादन
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Devesh Saraswat
Updated Sat, 06 Sep 2025 12:28 PM IST
सार
धारवाड़ स्थित कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय ने मोटे अनाजों की आठ नई उच्च उपज देने वाली और जलवायु-लचीली किस्में विकसित की हैं। इन किस्मों को कृषि मेले के दौरान औपचारिक रूप से जारी किया जाएगा।
बीते तीन दशकों में हमारे देश ने खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता का मुकाम हासिल कर लिया है। लेकिन, पोषण सुरक्षा हासिल करने की रफ्तार धीमी रही है। अधिकारियों से कृषि विशेषज्ञों तक खाद्य सुरक्षा से ऊपर उठकर अब पोषण पर फोकस करने की अहमियत पर बात करने लगे हैं।
खाने की थाली में पोषक खाद्यान्न पहुंचाने के लिए श्री अन्न को अच्छा माध्यम माना जा रहा है। धारवाड़ स्थित कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय (यूएएस) ने मोटे अनाजों की आठ नई उच्च उपज देने वाली और जलवायु-लचीली किस्में विकसित की हैं। इन किस्मों को कृषि मेले के दौरान औपचारिक रूप से जारी किया जाएगा।
मोटे अनाजों की खेती को सरकार का प्रोत्साहन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा बाजरा से जुड़े पोषण संबंधी लाभों पर जोर दिए जाने के बाद भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने कृषि विश्वविद्यालयों को मोटे अनाजों की खेती और खपत को बढ़ावा देने का काम सौंपा है। यूएएस के कुलपति, प्रोफेसर पी.एल. पाटिल कहते हैं कि केंद्र और राज्य सरकारें पोषण सुरक्षा को मजबूत करने और कुपोषण से निपटने के लिए मोटे अनाजों की खेती को बढ़ावा दे रही हैं। उन्होंने कहा की ये नई किस्में बाढ़ और सूखे दोनों को सहन करने में सक्षम हैं।
वैज्ञानिकों ने मोटे अनाजों के अलावा सब्जियों की भी दो उन्नत किस्में और 20 नई कृषि तकनीकें विकसित की हैं।
विकसित की गईं नई उन्नत किस्में
कंगनी या काकुन (Foxtail Millet) किस्म प्रति हेक्टेयर 31 क्विंटल की उच्च दे सकती है और इसकी चारे की उपज 5.15 टन प्रति हेक्टेयर है। कुटकी (Little Millet) किस्म की उपज 26.34 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और चारे की उपज 4.69 टन है।
विकसित की गई दूसरी किस्मों में सांवा (Barnyard millet) 34.28 क्विंटल/हेक्टेयर, रागी (Finger Millet) 36.07 क्विंटल/हेक्टेयर, कोदो (Kodo Millet) 36.07 क्विंटल/हेक्टेयर, चीना (Proso Millet) 24.66 क्विंटल/हेक्टेयर और तिल 800 किलोग्राम/हेक्टेयर शामिल हैं।
सब्जियों और सूरजमुखी में भी सफलता
बाजरा के अलावा, विश्वविद्यालय ने हाइब्रिड सूरजमुखी में एक बड़ी सफलता हासिल की है। यह किस्म 2,434 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज की उपज देती है, जिसमें 40 फीसदी तेल की मात्रा होती है। सूरजमुखी की यह किस्म नेक्रोसिस वायरस, ब्लाइट और पाउडरी मिल्ड्यू के प्रतिरोधी है। वहीं, सब्जियों में यूएएस ने भिंडी (DOV-1) विकसित की है, जिसकी उपज 17 टन प्रति हेक्टेयर है, और टमाटर (DTmV-5) की उपज 40 टन प्रति हेक्टेयर है।
बीते तीन सालों में मोटे अनाजों की खेती का रकबा 13 मिलियन हेक्टेयर से बढ़कर 14.5 मिलियन हेक्टेयर हो गया है। यह आंकड़ा किसानों के बीच मोटे अनाजों की खेती में बढ़ती रुचि को दिखाता है।
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