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India-US Trade: भारतीय समुद्री उत्पादों पर अमेरिकी शर्तों का असर, केंद्र सरकार का भी आया बयान

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Tue, 19 Aug 2025 06:07 PM IST
सार

 मत्स्यपालन विभाग के अनुसार, आंध्र प्रदेश समेत देश के समुद्री खाद्य निर्यात पर असर अलग-अलग कारकों से तय होता है—जैसे उत्पाद का प्रकार, मांग की स्थिति, गुणवत्ता मानक और निर्यातक-आयातक के बीच समझौते।

समुद्री उत्पाद
समुद्री उत्पाद - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारत सरकार ने साफ किया है कि अमेरिका द्वारा समुद्री उत्पादों पर लगाए गए नियम और शर्तें केवल भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कई देशों पर लागू होते हैं। इन शर्तों में स्वच्छता मानक और स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) संबंधी प्रावधान शामिल हैं। मत्स्यपालन विभाग के अनुसार, आंध्र प्रदेश समेत देश के समुद्री खाद्य निर्यात पर असर अलग-अलग कारकों से तय होता है—जैसे उत्पाद का प्रकार, मांग की स्थिति, गुणवत्ता मानक और निर्यातक-आयातक के बीच समझौते। यह जानकारी मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने लोक सभा में एक लिखित उत्तर में दी।

सरकार के कदम
प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और फिशरीज़ एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट फंड (FIDF) के तहत फिशिंग हार्बर, लैंडिंग सेंटर, कोल्ड चैन और प्रोसेसिंग सुविधाओं को मजबूत किया जा रहा है। आधुनिक तकनीकों जैसे री-सर्क्युलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) और बायोफ्लोक को बढ़ावा दिया जा रहा है। समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) निर्यातकों के पंजीकरण, गुणवत्ता मानकों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों के जरिए भारतीय समुद्री उत्पादों की मौजूदगी मजबूत कर रहा है।

अमेरिकी बाजार को लेकर विशेष तैयारी
  • PMMSY के तहत मरीन मेमल स्टॉक असेसमेंट प्रोजेक्ट लागू किया गया है।
  • श्रिम्प ट्रॉलरों में टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (TEDs) लगाने में मदद दी जा रही है।
  • सी रेंचिंग, आर्टिफिशियल रीफ्स और जैव विविधता संरक्षण जैसी योजनाएं मछुआरों की आजीविका सुरक्षित करने के लिए चलाई जा रही हैं।
  • सरकार का कहना है कि इन प्रयासों से न केवल निर्यात बाजार सुरक्षित रहेंगे बल्कि मछुआरों और प्रसंस्करणकर्ताओं की आय भी संरक्षित होगी। साथ ही, भारत का समुद्री क्षेत्र दीर्घकालिक रूप से प्रतिस्पर्धी बना रहेगा।