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ISRO के पूर्व चीफ का बड़ा बयान: बोले- समुद्र की गहराइयों तक भारत का अगला मिशन; पूरी प्लानिंग भी बता डाली

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Wed, 05 Nov 2025 01:21 PM IST
सार

भारत ने इसरो के माध्यम से अंतरिक्ष विज्ञान में विश्व स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है। अब विशेषज्ञ मानते हैं कि समुद्र विज्ञान और ब्लू इकोनॉमी में नेतृत्व हासिल करना अगला बड़ा कदम है।

इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस सोमनाथ CMFRI में संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए।
इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस सोमनाथ CMFRI में संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारत को अब अंतरिक्ष की तरह समुद्र विजय का मिशन (Ocean Mission) शुरू करना चाहिए जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), उपग्रह तकनीक और डीप-सी रिसर्च के जरिए समुद्री संसाधनों की पहचान और संरक्षण पर केंद्रित हो। यह बात भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने कही। वे आईसीएआर-सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (CMFRI) में आयोजित ‘इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन मरीन इकोसिस्टम्स (MECOS-4)’ के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।

इसरो के पूर्व चीफ ने और क्या कहा?
सोमनाथ ने कहा कि भारत को अपने ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) की क्षमता को समझने और तटीय मछुआरा समुदायों के जीवन में सुधार लाने के लिए समुद्र आधारित वैज्ञानिक अनुसंधान में तेजी लानी होगी। उन्होंने कहा, “भारत को तकनीक, नवाचार, डेटा एकीकरण और समन्वित अनुसंधान के जरिए सागरों को जीतने का मिशन शुरू करना चाहिए। जैसे इसरो ने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत का नेतृत्व किया, वैसे ही अब समुद्र विज्ञान में एकीकृत मंच तैयार करने की जरूरत है।”

समुद्री उपग्रहों से खुलेगा सागर का रहस्य
सोमनाथ ने बताया कि समुद्र से जुड़ी निगरानी के लिए एक नई सैटेलाइट श्रृंखला (Satellite Series) पर विचार चल रहा है। यह भारत के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और संसाधनों को समझने के लिए एक नए युग की शुरुआत होगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत के पास हाइपर-स्पेक्ट्रल सेंसर (Hyper-Spectral Sensors) नहीं हैं, जो समुद्री निगरानी और संसाधन मानचित्रण के लिए अत्यंत जरूरी हैं।

बोले, “देश को अधिक बॉय (Buoys) और मानवरहित हवाई यान (UAVs) की तैनाती करनी चाहिए ताकि वास्तविक समय (Real-time) में डेटा संग्रहण और निगरानी कवरेज को बढ़ाया जा सके। इसके साथ ही गहराई में डेटा एकत्र करने वाले डीप-सी सेंसर (Deep-Sea Sensors) की भी आवश्यकता है।”

एआई और डेटा इंटीग्रेशन से बनेगा 'ओशन इंटेलिजेंस सिस्टम'
सोमनाथ ने कहा कि समुद्री विज्ञान में अब तकनीकी एकीकरण का समय आ गया है। कहा, “समुद्र से जुड़े डेटा सिस्टम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) को शामिल करना आवश्यक है ताकि विश्लेषण, भविष्यवाणी मॉडलिंग और संसाधन प्रबंधन में बेहतर निर्णय लिए जा सकें।”

उन्होंने कहा कि डेटा इंटीग्रेशन (Data Integration) ही सतत समुद्री प्रशासन (Sustainable Ocean Governance) की कुंजी है। बताया कि टेक्नोलॉजी आधारित उद्यम ही जिम्मेदार तरीके से समुद्री संसाधनों के उपयोग और ब्लू इकोनॉमी को गति दे सकते हैं।

समुद्री सहयोग भारत की प्राथमिकता
इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के उप महानिदेशक जे के जेना ने अध्यक्षता की। विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव सी. एस. आर. राम ने कहा कि भारत के लिए समुद्री सहयोग (Maritime Cooperation) सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “यह समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक मजबूती, कनेक्टिविटी और ब्लू इकोनॉमी के विस्तार के लिए अत्यंत आवश्यक है।”

भारत के समुद्री वैज्ञानिक को मिला अंतरराष्ट्रीय सम्मान
इस कार्यक्रम में मरीन बायोलॉजिकल एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने प्रसिद्ध समुद्री वैज्ञानिक डॉ. जी. गोपाकुमार को चौथा ‘डॉ. एस. जोन्स मेमोरियल अवॉर्ड’ प्रदान किया। गोपाकुमार, जो सीएमएफआरआई (CMFRI) में मराइकल्चर डिवीजन के प्रमुख वैज्ञानिक और विभागाध्यक्ष रहे हैं, को भारत में मराइकल्चर और मरीन फिशरीज के विकास में चार दशक के योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

उनकी अगुवाई में कोबिया (Cobia) और सिल्वर पॉम्पानो (Silver Pompano) मछलियों की प्रजनन तकनीक विकसित की गई, जिससे पिंजरा मत्स्य पालन (Cage Fish Farming) को नई दिशा मिली और तटीय समुदायों को आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिली।