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Fisheries: समुद्री मत्स्य ढांचे को नई ताकत, कोच्चि में 250 टन क्षमता वाला स्लिपवे क्रेडल शुरू

बलराम चौधरी, कोसीकलां, मथुरा। Published by: Himanshu Mishra Updated Thu, 09 Oct 2025 09:12 AM IST
सार

करीब ₹1.78 करोड़ की लागत से फिशरी सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) द्वारा निर्मित यह संरचना देश में अब तक की सबसे बड़ी सरकारी पोत रखरखाव सुविधा है।

केंद्रीय मत्स्य पालन राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने स्लिपवे क्रेडल का शुभारंभ किया।
केंद्रीय मत्स्य पालन राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने स्लिपवे क्रेडल का शुभारंभ किया। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारत के समुद्री मत्स्य क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल करते हुए केंद्रीय मत्स्य राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने कोच्चि में 250 टन क्षमता वाले आधुनिक स्लिपवे क्रेडल का शुभारंभ किया। यह अत्याधुनिक सुविधा मछुआरा नौकाओं से लेकर अनुसंधान पोतों तक, विभिन्न प्रकार के जहाजों की मरम्मत और रखरखाव के लिए उपयोगी होगी।

करीब ₹1.78 करोड़ की लागत से फिशरी सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) द्वारा निर्मित यह संरचना देश में अब तक की सबसे बड़ी सरकारी पोत रखरखाव सुविधा है। इस भारी-भरकम स्टील प्लेटफॉर्म को 250 टन तक के वेसल्स को सुरक्षित रूप से पानी में उतारने और निकालने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

‘ब्लू इकोनॉमी’ की दिशा में बड़ा कदम
मंत्री जॉर्ज कुरियन ने कहा कि यह परियोजना भारत की सस्टेनेबल ब्लू इकोनॉमी के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर है। इस सुविधा से मत्स्य पालन से जुड़े लोगों, सरकारी एजेंसियों और समुद्री अनुसंधान संस्थानों को फायदा होगा। इससे निरंतर समुद्री अनुसंधान, मत्स्य संसाधन सर्वेक्षण और पारिस्थितिकी निगरानी संभव हो सकेगी।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) को मिलेगा बल
एफएसआई के महानिदेशक श्रीनाथ के. आर. ने बताया कि यह स्लिपवे क्रेडल प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले बेड़े के आधुनिकीकरण की दिशा में एक प्रमुख कदम है। इस सुविधा से नए अनुसंधान और मत्स्य पोतों की कार्यक्षमता और सुरक्षा सुनिश्चित होगी, जिससे उनकी उम्र और उत्पादकता दोनों बढ़ेंगी।

विभिन्न संस्थानों और जहाजों को मिलेगा रखरखाव सहयोग
कोच्चि स्थित एफएसआई स्लिपवे कॉम्प्लेक्स न केवल पारंपरिक मछुआरा नौकाओं, बल्कि कई महत्वपूर्ण संस्थानों के जहाजों के रखरखाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, जैसे सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (CMFRI), सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ फिशरीज टेक्नोलॉजी (CIFT), इंडियन कोस्ट गार्ड, कस्टम विभाग और लक्षद्वीप मत्स्य विभाग। इसके अलावा, यह सुविधा कोच्चि वॉटर मेट्रो, पर्यटन नौकाओं, अंतर्देशीय जल परिवहन पोतों, और निजी गहरे समुद्र संचालकों के लिए भी उपयोगी होगी।