Home›Fisheries›
High Prices Stall Bangladeshi Hilsa Imports Indian Markets Turn To Myanmar And Gujarat Fish
Bangladeshi Hilsa: महंगी कीमतों ने रोकी बांग्लादेशी हिलसा की राह, म्यांमार और गुजरात की मछली बनी सहारा
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Thu, 25 Sep 2025 06:51 AM IST
सार
कोलकाता की मशहूर मंडियों में हिलसा की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बिगड़ने से औसत कीमत पिछले हफ्ते के मुकाबले 200-300 रुपये किलो तक गिर गई है।
बांग्लादेशी हिलसा मछली
- फोटो : सोशल मीडिया
Link Copied
विस्तार
दुर्गा पूजा से पहले हर साल पश्चिम बंगाल के बाज़ारों में बांग्लादेश से आई हिलसा (इलिश) की धूम रहती है, लेकिन इस बार ‘मछलियों की रानी’ के स्वाद का मजा लोगों को कम ही मिल पाएगा। बांग्लादेश सरकार ने 1200 टन हिलसा के निर्यात की मंज़ूरी दी थी, मगर अब तक भारत में सिर्फ़ 80 टन मछली ही पहुंच सकी है। वजह है बांग्लादेशी हिलसा की आसमान छूती कीमतें, जिसने आयातकों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है।
17 सितंबर को पहला क़ाफिला पद्मा नदी की हिलसा लेकर पेट्रापोल बॉर्डर से भारत आया। शुरुआती दिन आठ ट्रकों में करीब 37 टन मछली आई, लेकिन इसके बाद गिनती लगातार घटती गई। मंगलवार को सिर्फ़ दो ट्रक पहुंचे। सीमा शुल्क विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब और ट्रकों के आने की संभावना बहुत कम है।
आयातकों को घाटा
फिश इम्पोर्टर्स एसोसिएशन के सचिव सैयद अनवर मकसूद ने बताया कि बांग्लादेशी हिलसा की कीमत इस बार बहुत ज़्यादा है, जबकि कोलकाता के बड़े बाज़ारों में उपभोक्ता उतनी ऊंची कीमत चुकाने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा, “हम पहले ही नुकसान उठा चुके हैं। 1900-2000 रुपये किलो की दर पर बांग्लादेशी हिलसा बिक ही नहीं रही। जबकि म्यांमार और गुजरात की हिलसा 900 से 1000 रुपये किलो में आसानी से बिक रही है। ऐसे में आगे आयात करना घाटे का सौदा है।”
बाजार में असर
कोलकाता की मशहूर मंडियों में हिलसा की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बिगड़ने से औसत कीमत पिछले हफ्ते के मुकाबले 200-300 रुपये किलो तक गिर गई है। पश्चिम बंगाल सरकार के टास्क फोर्स सदस्य कमल दे के मुताबिक, “जब म्यांमार और गुजरात की हिलसा कम दाम पर उपलब्ध है, तो लोग बांग्लादेशी हिलसा की ओर रुख नहीं कर रहे हैं।”
त्योहार में स्वाद की कमी
त्योहार के मौसम में ‘पद्मा इलिश’ का अपना अलग ही आकर्षण होता है, लेकिन इस बार कोलकाता के कई घरों में इलीश पातुरी और भापा इलिश जैसे पारंपरिक व्यंजन शायद कम ही बनें। महंगी बांग्लादेशी हिलसा की जगह लोगों को गुजरात और म्यांमार की मछलियों से ही संतोष करना होगा।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।