Home›Fisheries›
Fisherfolk Seek Representation In Eez Fishing Policy Bodies To Ensure Responsible Fishing
Fisheries Policy: EEZ में मछली पकड़ नीति में मछुआरों को शामिल करने की मांग, केंद्र से अपील
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Thu, 25 Dec 2025 11:52 AM IST
सार
समुद्री मत्स्य संसाधनों के संरक्षण और जिम्मेदार मछली पकड़ को लेकर चल रही नीतिगत कवायद के बीच मछुआरा समुदाय ने सरकार के सामने एक अहम सवाल खड़ा किया है। मछुआरों का कहना है कि जब तक एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) में मछली पकड़ से जुड़ी नीतियों के निर्माण में उन्हें सीधे शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक टिकाऊ और व्यावहारिक समाधान संभव नहीं है।
मछली बाजार
- फोटो : सोशल मीडिया
Link Copied
विस्तार
केरल की फेडरेशन ऑफ फिशिंग बोट्स एंड फिशरी इंडस्ट्रीज ने प्रधानमंत्री को भेजे एक प्रतिनिधित्व में कहा है कि 78 वर्षों से मत्स्य क्षेत्र, मछुआरों के कल्याण और उनके उत्थान को लेकर चर्चा होती रही है, लेकिन अब तक सरकार ने यह आकलन नहीं किया है कि गहरे समुद्र में चलने वाले जहाज वास्तव में EEZ और उससे आगे मछली पकड़ने में कितने सक्षम हैं।
फेडरेशन के अध्यक्ष पॉल राजन मम्पिल्ली और महासचिव जोसेफ जेवियर कलप्पुरक्कल ने कहा कि डीप-सी फिशिंग का नियंत्रण और प्रबंधन स्वयं मछुआरों के हाथ में होना चाहिए। उनका तर्क है कि मौजूदा नीतियों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर है। मछली पकड़कर आजीविका चलाने वाले लोग और नीतियां बनाने वाले अधिकारी “दो अलग-अलग दुनियाओं में रहते हैं।”
उन्होंने बताया कि छोटे और पारंपरिक नौकाओं से मछली पकड़ने वाले मछुआरों ने समुद्री धाराओं, पानी के नीचे के बदलावों और मछलियों के जीवन चक्र को वर्षों के अनुभव से समझा है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नीति निर्माण में विशेषज्ञ के रूप में मान्यता नहीं दी जाती।
फेडरेशन ने यह भी आरोप लगाया कि EEZ में टिकाऊ मछली पकड़ को लेकर चलाया जा रहा कार्यक्रम ठोस वैज्ञानिक आधार पर नहीं टिका है। मछली उत्पादन और संभावित पकड़ के जो अनुमान लगाए जा रहे हैं, वे पर्याप्त आंकड़ों और शोध के बिना तैयार किए गए हैं।
नीति निर्धारकों के लिए EEZ जो 12 समुद्री मील से 200 समुद्री मील तक फैला होता है। केवल एक कानूनी या प्रशासनिक सीमा बनकर रह गया है। जबकि वास्तविकता यह है कि जैसे-जैसे समुद्र की गहराई बढ़ती है, मछलियों की उपलब्धता कम होती जाती है और संचालन लागत कई गुना बढ़ जाती है।
संगठन ने यह भी कहा कि पारंपरिक मछुआरा समुदाय में बड़ी संख्या में युवा शामिल हैं, जो तटीय जल और गहरे समुद्र दोनों में मछली पकड़ का काम कर रहे हैं। आने वाले वर्षों में यही युवा मत्स्य क्षेत्र की रीढ़ साबित होंगे। ऐसे में, यदि इन्हें नीति निर्माण से बाहर रखा गया तो टिकाऊ मत्स्य प्रबंधन का लक्ष्य अधूरा रह जाएगा।
फेडरेशन ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि EEZ में मछली पकड़ से जुड़ी सभी नीतिगत संस्थाओं और निर्णय लेने वाली समितियों में मछुआरों को औपचारिक प्रतिनिधित्व दिया जाए, ताकि समुद्री संसाधनों का संरक्षण भी हो और मछुआरों की आजीविका भी सुरक्षित रह सके।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।