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Fao To Assist India In Drafting Action Plan For Small Scale Fisheries Focus On Fisher Rights And Sustainability
Agri News: छोटे मत्स्य पालकों को मजबूती देगा FAO, भारत समेत कई देशों के लिए बनेगी कार्ययोजना
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Tue, 16 Sep 2025 01:04 PM IST
सार
FAO और बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम इंटर-गवर्नमेंटल ऑर्गनाइजेशन (BOBP-IGO) के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस सम्मेलन का उद्देश्य राष्ट्रीय टास्क फोर्स की टीम को प्रशिक्षित करना और देशवार रोडमैप तैयार करना है।
चेन्नई के मरीना बीच पर मछुआरे।
- फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
जलवायु परिवर्तन और संसाधनों की बढ़ती प्रतिस्पर्धा से जूझ रहे मछुआरों के लिए बड़ा कदम उठाया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) भारत समेत बंगाल की खाड़ी से जुड़े देशों की मदद करेगा ताकि छोटे पैमाने की मत्स्य पालन (Small-Scale Fisheries) को बढ़ावा देने और पारंपरिक मछुआरों की आजीविका को सुरक्षित करने के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना (NPOA-SSF) तैयार की जा सके।
इसके तहत भारत, बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव के लिए देश-विशिष्ट रोडमैप तैयार किया जाएगा। इस दिशा में 17 से 19 सितंबर तक चेन्नई में तीन दिवसीय क्षेत्रीय क्षमता निर्माण बैठक आयोजित होगी। इसमें इन देशों के वरिष्ठ अधिकारी, नीति-निर्माता, समुद्री वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे। बैठक का उद्घाटन भारत के केंद्रीय मत्स्य सचिव अभिलक्ष लिखी (IAS) करेंगे।
मछुआरों के अधिकार और सुरक्षा पर फोकस
FAO और बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम इंटर-गवर्नमेंटल ऑर्गनाइजेशन (BOBP-IGO) के संयुक्त तत्वावधान में होने वाले इस सम्मेलन का उद्देश्य राष्ट्रीय टास्क फोर्स की टीम को प्रशिक्षित करना और देशवार रोडमैप तैयार करना है। प्रस्तावित कार्ययोजनाओं में मछुआरों के अधिकार, सुरक्षित कार्य परिस्थितियां, समुद्र में सुरक्षा, महिलाओं की भागीदारी और समुद्री संसाधनों के टिकाऊ प्रबंधन जैसे मुद्दों को शामिल किया जाएगा।
BOBP-IGO के निदेशक पी. कृष्णन ने कहा कि यह प्रयास बंगाल की खाड़ी क्षेत्र की मत्स्य समुदायों का भविष्य मजबूत करेगा। इससे न केवल मछुआरों की आजीविका सुरक्षित होगी, बल्कि समुद्री और अंतर्देशीय संसाधनों का सतत प्रबंधन करते हुए बेहतर खाद्य उत्पादन भी संभव होगा।
आजीविका और खाद्य सुरक्षा का आधार
FAO की अंतरराष्ट्रीय मत्स्य विश्लेषक लीना मारिया वेस्टलुंड ने कहा, “छोटे पैमाने की मत्स्य पालन तटीय समुदायों की रीढ़ है। यह लाखों लोगों को खाद्य सुरक्षा और रोजगार उपलब्ध कराती है। लेकिन आज यह क्षेत्र जलवायु संकट और संसाधनों की होड़ जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। इसी कारण देशवार रोडमैप बनाना बेहद अहम है।”
भारत की भागीदारी
भारत की ओर से सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ फिशरीज टेक्नोलॉजी, सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट, फिशरी सर्वे ऑफ इंडिया समेत कई संगठनों के वैज्ञानिक और सरकारी मत्स्य अधिकारी इस बैठक में शामिल होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल सतत विकास लक्ष्य (SDG 14) की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी और छोटे पैमाने की मत्स्य पालन को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करेगी।
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