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Experts Call For National Action Plan To Conserve Indias Marine Mammals And Coastal Biodiversity
Marine News: भारत के समुद्री जीवों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय कार्ययोजना की मांग, विशेषज्ञों ने जताई चिंता
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Fri, 07 Nov 2025 10:47 AM IST
सार
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत के पास लगभग 7,500 किलोमीटर लंबी तटीय रेखा और समृद्ध समुद्री जैवविविधता है, लेकिन इस प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा के लिए नीति-स्तर पर ठोस कदम उठाना अब अनिवार्य हो गया है।
समुद्री जीव
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारत के तटीय क्षेत्रों में समुद्री जीवों, विशेष रूप से व्हेल, डॉल्फिन और डुगोंग (समुद्री गाय) जैसी दुर्लभ प्रजातियों के सामने बढ़ती चुनौतियों के बीच विशेषज्ञों ने इनके संरक्षण के लिए "राष्ट्रीय समुद्री स्तनधारी संरक्षण कार्ययोजना" (National Plan of Action for Marine Mammal Conservation) तैयार करने की तत्काल जरूरत पर जोर दिया है। यह चर्चा हाल ही में आयोजित एक सत्र के दौरान हुई, जिसमें विशेषज्ञों ने कहा कि भारत के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में तेजी से बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और मछली पकड़ने की गतिविधियों से समुद्री जैवविविधता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय निर्यात में भी मददगार बना भारत का शोध
बैठक के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) द्वारा समुद्री स्तनधारियों पर किए गए नवीनतम शोध ने भारत को अमेरिका को समुद्री खाद्य निर्यात (Seafood Export) में आई एक बड़ी बाधा पार करने में मदद की है। यह सफलता इस बात का उदाहरण है कि वैज्ञानिक अनुसंधान न केवल संरक्षण बल्कि आर्थिक क्षेत्र में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
समन्वित नेटवर्क की जरूरत
सत्र की अध्यक्षता करते हुए केरल यूनिवर्सिटी ऑफ फिशरीज एंड ओशन स्टडीज़ (KUFOS) के कुलपति ए. बिजूकुमार ने कहा कि भारत को राष्ट्रीय स्तर पर बहु-संस्थागत समुद्री स्तनधारी नेटवर्क (Marine Mammal Network) स्थापित करना चाहिए। यह नेटवर्क देशभर में अनुसंधान, निगरानी और संरक्षण गतिविधियों को एकसमान ढंग से समन्वित कर सकेगा।
संरक्षण के लिए समग्र योजना आवश्यक
CMFRI के निदेशक ग्रिन्सन जॉर्ज ने कहा कि भारत को एक समन्वित, वित्त-पोषित और दीर्घकालिक संरक्षण योजना की आवश्यकता है, जिसमें अनुसंधान संस्थानों, प्रवर्तन एजेंसियों और तटीय समुदायों की भूमिका स्पष्ट रूप से परिभाषित हो। उन्होंने यह भी कहा कि समुद्र तटों पर फंसे (Stranded) समुद्री स्तनधारियों की जांच और पोस्टमार्टम (Autopsy) केवल प्रशिक्षित समुद्री वैज्ञानिकों और प्रमाणित संस्थानों को करने की अनुमति दी जानी चाहिए, ताकि उनकी मृत्यु के सही कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सके।
समुद्री जैवविविधता की रक्षा जरूरी
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत के पास लगभग 7,500 किलोमीटर लंबी तटीय रेखा और समृद्ध समुद्री जैवविविधता है, लेकिन इस प्राकृतिक संपदा की सुरक्षा के लिए नीति-स्तर पर ठोस कदम उठाना अब अनिवार्य हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अभी भी ठोस रणनीति नहीं अपनाई गई तो भारत के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन और प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा और बढ़ सकता है।
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