Home Fisheries Cold Water Trout Farming Begins In Warm Telangana Indias First Inland Facility Launched

Trout Farming: तेलंगाना में भी अब ठंडे पानी की ट्राउट मछली की फार्मिंग, देश की पहली इनलैंड यूनिट शुरू

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Tue, 06 Jan 2026 12:42 PM IST
सार

तेलंगाना में शुरू हुई यह इनलैंड ट्राउट फार्मिंग परियोजना न केवल मत्स्य पालन क्षेत्र में तकनीकी नवाचार का उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि उन्नत तकनीक के सहारे भारत में उच्च मूल्य वाली ठंडे पानी की प्रजातियों का उत्पादन अब किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा।

Cold-Water Trout Farming
Cold-Water Trout Farming - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अब तक ठंडे पहाड़ी इलाकों तक सीमित मानी जाने वाली ट्राउट मछली की खेती ने भारत में एक नया इतिहास रच दिया है। तेलंगाना जैसे अपेक्षाकृत गर्म राज्य में पहली बार ठंडे पानी में पनपने वाली ट्राउट मछली का व्यावसायिक उत्पादन शुरू हुआ है। रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) जैसी अत्याधुनिक तकनीक के जरिए यह साबित किया गया है कि उन्नत तकनीक के सहारे भौगोलिक सीमाओं को पार कर ठंडे पानी की प्रीमियम प्रजातियों का उत्पादन देश के भीतर संभव है।

तेलंगाना में देश की पहली इनलैंड ट्राउट फार्मिंग यूनिट
स्मार्टग्रीन एक्वाकल्चर (SmartGreen Aquaculture – SGA) ने तेलंगाना के रंगा रेड्डी जिले के कंदुकूर मंडल में भारत की पहली इनलैंड ट्राउट फार्मिंग सुविधा शुरू की है। इस परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने किया। यह परियोजना दक्कन के पठारी क्षेत्र जैसे गर्म इलाकों में भी ठंडे पानी की मछली पालन की व्यवहारिकता को दर्शाती है।

6 मिलियन डॉलर का निवेश, 1,200 टन सालाना उत्पादन क्षमता
करीब 6 मिलियन डॉलर के निवेश से विकसित इस अत्याधुनिक सुविधा की कुल उत्पादन क्षमता 1,200 टन प्रति वर्ष होगी। यह यूनिट पूरी तरह से टिकाऊ रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) तकनीक पर आधारित है, जिसमें पानी को बार-बार शुद्ध कर पुनः उपयोग किया जाता है। इस तकनीक के जरिए नियंत्रित तापमान, स्वच्छता और जैव-सुरक्षा के साथ सालभर ट्राउट मछली का उत्पादन संभव हो सकेगा।

पूरी वैल्यू चेन एक ही परिसर में
इस ट्राउट फार्म में केवल मछली उत्पादन ही नहीं, बल्कि पूरी वैल्यू चेन को एक ही परिसर में विकसित किया गया है। इसमें शामिल हैं...
  • हैचरी यूनिट
  • इनडोर RAS ग्रो-आउट सिस्टम
  • ऑन-साइट प्रोसेसिंग यूनिट
  • कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर
  • उपभोक्ताओं तक सीधे डिलीवरी के लिए ऑनलाइन स्टोर
  • इसके जरिए ताजा और वैल्यू-एडेड ट्राउट उत्पाद सीधे ग्राहकों तक पहुंचाए जाएंगे।

आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में कदम
SGA के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर आदित्य ऋत्विक नर्रा के अनुसार, अब तक भारत में ट्राउट की खेती भौगोलिक सीमाओं के कारण सीमित थी। उन्नत क्लोज्ड-लूप वॉटर सिस्टम और RAS तकनीक ने इस बाधा को दूर कर दिया है। उन्होंने कहा कि हैचरी, फार्मिंग, प्रोसेसिंग और ई-कॉमर्स को एक साथ जोड़कर न केवल आयात पर निर्भरता घटाई जा रही है, बल्कि बिचौलियों की भूमिका भी कम हो रही है। इससे उपभोक्ताओं को ज्यादा ताजा, प्रीमियम और ट्रेस करने योग्य ट्राउट मछली उपलब्ध हो सकेगी।

घरेलू प्रीमियम सीफूड बाजार पर फोकस
SGA का मुख्य फोकस घरेलू प्रीमियम सीफूड बाजार पर रहेगा। कंपनी रिटेल उपभोक्ताओं के साथ-साथ होटल, रेस्तरां और संस्थागत खरीदारों को ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से आपूर्ति करेगी। गौरतलब है कि भारत में ट्राउट मछली का मौजूदा उत्पादन करीब 4,440 टन है, और यह परियोजना भविष्य में देश के कुल उत्पादन को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।