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Cmfri Forms Panel To Study Shark Fishing And Trade Amid Wildlife Act Changes
Shark Fishing: शार्क मछली पकड़ने और व्यापार पर बनेगी समिति, CMFRI करेगा वैज्ञानिक अध्ययन
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Fri, 19 Sep 2025 09:32 AM IST
सार
सीएमएफआरआई निदेशक डॉ. ग्रिन्सन जॉर्ज ने कहा कि समिति इन संरक्षित प्रजातियों के जैविक-पर्यावरणीय पहलुओं और मछुआरों की आजीविका पर पड़े सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का अध्ययन करेगी।
शार्क मछली
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
भारत में मछुआरा समुदाय की बढ़ती चिंताओं को देखते हुए आईसीएआर-सीएमएफआरआई (सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट) ने शार्क मछली पकड़ने और व्यापार से जुड़े मुद्दों पर वैज्ञानिक अध्ययन के लिए एक विशेष समिति गठित की है। यह कदम वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 में संशोधित प्रावधानों के बाद उठाया गया है, जिसके तहत कई शार्क और रे प्रजातियों को विभिन्न शेड्यूल में शामिल कर कड़े नियम लागू किए गए हैं।
मछुआरों की आजीविका और प्रजातियों की सुरक्षा में संतुलन
सीएमएफआरआई निदेशक डॉ. ग्रिन्सन जॉर्ज ने कहा कि समिति इन संरक्षित प्रजातियों के जैविक-पर्यावरणीय पहलुओं और मछुआरों की आजीविका पर पड़े सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का अध्ययन करेगी। उन्होंने एक वर्कशॉप के दौरान कहा कि समुद्र में बायकैच (अनचाही प्रजातियों का जाल में फंसना) को रोका नहीं जा सकता, और इस स्थिति में कठोर दंड मछुआरों और संरक्षण प्रयासों के बीच टकराव पैदा करता है। इसलिए ज़रूरी है कि जैव विविधता संरक्षण और मछुआरों की आजीविका सुरक्षा में संतुलन बनाया जाए।
शेड्यूल-IV थ्रेशर शार्क को लेकर भ्रम दूर
कन्याकुमारी में थ्रेशर शार्क की लैंडिंग पर हुए विवाद के बाद सीएमएफआरआई ने स्पष्ट किया कि यह प्रजाति शेड्यूल-IV में आती है। इसका मतलब है कि घरेलू स्तर पर मछली पकड़ना और व्यापार प्रतिबंधित नहीं है, जबकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार CITES नियमों के तहत नियंत्रित रहेगा। सीएमएफआरआई को पर्यावरण मंत्रालय ने CITES वैज्ञानिक प्राधिकरण के रूप में अधिसूचित किया है।
सीएमएफआरआई ने सुझाव दिया
प्रवर्तन एजेंसियों और मछुआरों को प्रजाति पहचान में प्रशिक्षण दिया जाए।
समुदाय आधारित निगरानी और आत्म-नियमन को बढ़ावा मिले।
नियमित वैज्ञानिक आकलन किए जाएं।
अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए नॉन-डिट्रिमेंट फाइंडिंग्स (NDFs) तैयार की जाएं।
इन प्रस्तावों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि संरक्षण के प्रयास प्रभावी हों और साथ ही मछुआरों की आजीविका भी सुरक्षित बनी रहे।
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