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सर्दियों की शुरुआत होते ही दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन में 15 से 20 प्रतिशत तक की कमी देखी जाती है। तापमान गिरने पर पशुओं का शरीर अधिक ऊर्जा खर्च करता है, जिससे पोषण की कमी होने पर दूध का स्तर घटने लगता है। पशुपालकों के लिए यह समय बेहद संवेदनशील होता है, क्योंकि गलत खान-पान और ठंड से बचाव की कमी सीधे उत्पादन पर असर डालती है। विशेषज्ञों के अनुसार, थोड़ी-सी सावधानी और संतुलित आहार देकर इस कमी को पूरी तरह रोका जा सकता है।
गलत आहार से कम होता है दूध उत्पादन
कृषि विज्ञान केंद्र, सुलतानपुर के पशु चिकित्सक डॉ. दिवाकर कुमार बताते हैं कि सर्दियों में कई किसान दुधारू पशुओं को सिर्फ सूखा चारा या एक जैसा भोजन देते रहते हैं। इससे कैल्शियम, प्रोटीन और मिनरल्स की कमी हो जाती है, परिणामस्वरूप पशु का शरीर तो कमजोर पड़ता ही है, दूध उत्पादन भी कम होने लगता है। ठंड से लड़ने में शरीर अतिरिक्त ऊर्जा खर्च करता है, इसलिए पोषक आहार का संतुलन जरूरी है।
सर्दियों में आहार में शामिल करें ये दो चीजें
डॉ. दिवाकर के अनुसार, सर्दियों में पशुओं को गुड़ में दो चीजें मिलाकर देनी चाहिए—
- सरसों की खली
- अलसी का केक
इन दोनों चीजों को गुड़ के साथ मिलाकर देने से पशुओं के शरीर में गर्मी बनी रहती है, ऊर्जा की कमी नहीं होती और दूध उत्पादन स्थिर रहता है। इसके साथ ही कैल्शियम और मिनरल मिक्सचर नियमित रूप से देना जरूरी है। हरे चारे में बरसीम को 4–5 घंटे सुखाकर ही देना बेहतर माना जाता है, ताकि यह सुरक्षित और पौष्टिक रहे।
ठंड से बचाव भी उतना ही जरूरी
दुधारू पशुओं के बच्चों पर सर्दी का सबसे अधिक खतरा होता है। उन्हें निमोनिया और संक्रमण होने की आशंका रहती है। इसलिए बाड़े में उचित गर्माहट बनाए रखना आवश्यक है। पशुपालक जूट के बोरे से देसी स्वेटर बनाकर बछड़ों को पहनाएं। सुबह धूप दिखाना, समय-समय पर डीवॉर्मिंग और बाड़े में धान की पराली बिछाना ठंड से बचाव के असरदार तरीके हैं।