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Nddb Mother Dairy To Roll Out Second Phase Of Dairy Development Project In Vidarbha And Marathwada
Dairy: दूध उत्पादकों के लिए NDDB और मदर डेयरी का बड़ा प्लान, बढ़ जाएगी कमाई, जानें सबकुछ
बलराम चौधरी, कोसीकलां, मथुरा।
Published by: Himanshu Mishra
Updated Thu, 09 Oct 2025 07:42 AM IST
सार
विदर्भ और मराठवाड़ा ऐसे क्षेत्र हैं जो लंबे समय से कृषि संकट और किसान आत्महत्याओं के लिए कुख्यात रहे हैं। सरकार का मानना है कि यह डेयरी विकास परियोजना किसानों को नई आजीविका का आधार देगी, कृषि पर निर्भरता घटाएगी और क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
डेयरी किसानों को फायदा होगा
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे संकटग्रस्त कृषि क्षेत्रों में किसानों की आय बढ़ाने और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) और मदर डेयरी मिलकर डेयरी विकास परियोजना का दूसरा चरण शुरू करने जा रहे हैं। इस परियोजना का लक्ष्य दूध संग्रहण बढ़ाने, चारे की खेती को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता के नए अवसर तैयार करना है।
यह निर्णय नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और राज्य की पर्यावरण व पशुपालन मंत्री पंकजा मुंडे के बीच हुई बैठक में लिया गया। बैठक में विदर्भ और मराठवाड़ा के दुग्ध उद्योग को सशक्त करने के लिए विभिन्न उपायों पर चर्चा हुई।
19 जिलों में होगा दूसरा चरण लागू
परियोजना का दूसरा चरण विदर्भ के 11 जिलों और मराठवाड़ा के 8 जिलों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में केवल 11 जिलों को शामिल किया गया था, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ाकर कुल 19 जिलों तक पहुंचाया जा रहा है। इस पहल के तहत किसानों से अधिशेष दूध का संग्रह, डेयरी विकास को बढ़ावा, दुग्ध पशुओं की संख्या में वृद्धि, और किसानों को वित्तीय सहायता व स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
किसानों को मिलेंगे उच्च उत्पादकता वाले पशु व तकनीकी लाभ
परियोजना के अंतर्गत किसानों को उच्च दूध उत्पादन वाली गाय और भैंसें, पशुओं के लिए पोषक सप्लीमेंट्स और फ़ीड एडिटिव्स, और दूध में फैट व एसएनएफ (Solids-not-Fat) की मात्रा बढ़ाने के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
इसके अलावा, किसानों को स्थायी चारे की खेती पर सब्सिडी, इलेक्ट्रिक चाफ कटर और साइलैज के वितरण, तथा आधुनिक डेयरी प्रबंधन पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। इन प्रयासों से दूध उत्पादन और किसानों की आय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।
कृषि संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए नई उम्मीद
विदर्भ और मराठवाड़ा ऐसे क्षेत्र हैं जो लंबे समय से कृषि संकट और किसान आत्महत्याओं के लिए कुख्यात रहे हैं। सरकार का मानना है कि यह डेयरी विकास परियोजना किसानों को नई आजीविका का आधार देगी, कृषि पर निर्भरता घटाएगी और क्षेत्र में आर्थिक स्थिरता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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