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Dairy: हरियाणा के दुग्ध सहकारिता मॉडल से बदल रही किस्मत, मिल रही आर्थिक ताकत, 25 हजार महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Sun, 16 Nov 2025 10:38 AM IST
सार

फेडरेशन के आंकड़ों के अनुसार, करीब 3000 गांव दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े हुए हैं। कुल 2.5 लाख पंजीकृत सदस्यों में से 75 हजार सदस्य प्रतिदिन दूध आपूर्ति कर रहे हैं। जींद, अंबाला, रोहतक, बल्लभगढ़, सिरसा और कुरुक्षेत्र स्थित वीटा प्लांट 9.45 लाख लीटर प्रतिदिन प्रसंस्करण क्षमता वाले हैं।

डेयरी
डेयरी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हरियाणा में सहकारिता का मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सबसे सशक्त स्तंभ बनकर उभरा है। खासकर महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता में इस मॉडल ने नई पहचान बनाई है। हरियाणा डेयरी डेवलपमेंट को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (HDDCF) के छह वीटा मिल्क प्लांट तक आज 75 हजार सदस्य नियमित रूप से दूध की आपूर्ति कर रहे हैं, जिनमें लगभग 25 हजार महिलाएं शामिल हैं। ये महिलाएं अब घर-परिवार की जिम्मेदारियों के साथ-साथ आर्थिक मजबूती की मिसाल बन रही हैं। राज्य में 3300 दुग्ध सहकारी समितियां सक्रिय हैं, जिनमें से 1870 समितियों का संचालन पूरी तरह महिलाओं के हाथ में है। इससे स्पष्ट होता है कि हरियाणा में सहकारिता न सिर्फ रोजगार बल्कि सामाजिक नेतृत्व का नया मॉडल भी प्रस्तुत कर रही है।

महिलाओं ने थामा नेतृत्व, सहकारिता से बदली जिंदगी
फेडरेशन के आंकड़ों के अनुसार, करीब 3000 गांव दुग्ध सहकारी समितियों से जुड़े हुए हैं। कुल 2.5 लाख पंजीकृत सदस्यों में से 75 हजार सदस्य प्रतिदिन दूध आपूर्ति कर रहे हैं। जींद, अंबाला, रोहतक, बल्लभगढ़, सिरसा और कुरुक्षेत्र स्थित वीटा प्लांट 9.45 लाख लीटर प्रतिदिन प्रसंस्करण क्षमता वाले हैं।
  • सर्दियों में औसत सप्लाई: 8.50 लाख लीटर प्रतिदिन
  • गर्मियों में औसत सप्लाई: 4 लाख लीटर प्रतिदिन

फेडरेशन के चेयरमैन डॉ. रामअवतार गर्ग का कहना है कि पशुपालकों को समय पर भुगतान, अनुदान और पारदर्शी व्यवस्था ने ग्रामीण परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। इससे रोजगार, आय और सामाजिक सशक्तिकरण तीनों स्तरों पर प्रगति हुई है।

एक भैंस से शुरुआत, आज 8 भैंसों की डेयरी यूनिट
जींद के अमरहेड़ी गांव की सोनिया 2007 में केवल एक भैंस से अपनी डेयरी यात्रा शुरू करने का उदाहरण बताती हैं। वे कहती हैं कि वीटा से जुड़ने का सबसे बड़ा लाभ है समय पर भुगतान और पारदर्शी व्यवस्था। समिति द्वारा दी जाने वाली सुविधाएं भी महिलाओं और परिवारों को मजबूत बना रही हैं:
  • समिति में 80% से अधिक अंक लाने वाले बच्चों को छात्रवृत्ति
  • बेटियों के जन्म पर 11,000 रुपये की फिक्स डिपॉजिट सुविधा

सफलता की कहानी
सोनिया आज 8 भैंसों की डेयरी यूनिट चलाती हैं और परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हो चुका है। इसी तरह अंबाला की बलविंदर कौर और जींद की सुमन देवी बताती हैं कि डेयरी सहकारिता से उनकी आमदनी स्थायी हुई और वे वास्तविक रूप से आत्मनिर्भर बनीं।

अनुदान, बीमा और पारदर्शी भुगतान सीधे लाभ पशुपालकों को
मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक प्रोत्साहन योजना के तहत दूध सप्लाई पर 3 से 10 रुपये प्रति लीटर तक का अनुदान सीधे खाते में भेजा जाता है। पशुपालकों को दुर्घटना बीमा और अन्य लाभ भी मिलते हैं। पिछले वर्ष:
  • औसत सप्लाई मूल्य: 5 लाख लीटर प्रतिदिन
  • कुल वार्षिक सप्लाई: 18.50 करोड़ लीटर
  • समितियों को भुगतान: 8.78 करोड़ रुपये
वीटा प्लांटों में पहुंचा दूध दूध उत्पादों के निर्माण के साथ-साथ विद्यालयों में मिड-डे मील के लिए भी उपयोग होता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में यह सहकारी मॉडल मजबूत नींव बन चुका है और हजारों परिवारों के लिए स्थायी आय का आधार बना हुआ है।