Home Dugdhshala Haryana To Set Up States Largest Scada Based Milk Plant In Bawal Farmers To Gain From Expanded Processing Capacity

डेयरी उत्पादकों के लिए अच्छी खबर: यहां 16 एकड़ में बनेगा आधुनिक स्काडा मिल्क प्लांट, किसानों को मिलेगा लाभ

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Mon, 17 Nov 2025 01:01 PM IST
सार

 हरियाणा डेयरी सेक्टर ने पिछले 50 वर्षों में लगातार विस्तार किया है। प्लांटों की क्षमता और आधुनिकता बढ़ी है, जिससे दुग्ध उत्पादन और किसानों की आमदनी में वृद्धि हुई है।
 

डेयरी किसानों को फायदा मिलेगा।
डेयरी किसानों को फायदा मिलेगा। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हरियाणा सरकार राज्य के डेयरी उद्योग को नई ऊंचाई देने की तैयारी में है। दूध प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए हरियाणा डेयरी डेवलपमेंट कोऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (HDDCF) रेवाड़ी के बावल में 16 एकड़ में अत्याधुनिक स्काडा प्रणाली से संचालित होने वाला नया और सबसे बड़ा मिल्क प्लांट स्थापित करने जा रहा है। यह प्लांट न सिर्फ राज्य की डेयरी क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि हजारों दुग्ध उत्पादक किसानों को स्थिर आय और बेहतर बाजार उपलब्ध करवाएगा।

हरियाणा में अब होंगे 7 वीटा मिल्क प्लांट
फिलहाल हरियाणा में छह वीटा प्लांट संचालित हैं। दूध की बढ़ती मांग और उत्पादन क्षमता में विस्तार के चलते अब सातवां प्लांट रेवाड़ी के बावल में स्थापित किया जा रहा है, जो तकनीक के मामले में सबसे आधुनिक होगा।

राज्य में पहले स्थापित प्लांट—ऐतिहासिक सफर
1970 से अब तक डेयरी विकास का विस्तार जारी है। हरियाणा डेयरी सेक्टर ने पिछले 50 वर्षों में लगातार विस्तार किया है। प्लांटों की क्षमता और आधुनिकता बढ़ी है, जिससे दुग्ध उत्पादन और किसानों की आमदनी में वृद्धि हुई है।
 
वर्ष स्थान क्षमता
1970–72 जींद 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन
1973–74 अंबाला  1.40 लाख लीटर प्रतिदिन
1976–77 रोहतक  4 लाख लीटर प्रतिदिन
1979–80 बल्लभगढ़ 1.25 लाख लीटर प्रतिदिन
1996–97  सिरसा 1.10 लाख लीटर प्रतिदिन
2014–15 कुरुक्षेत्र  20 हजार लीटर प्रतिदिन
     
   
अब सबसे बड़ा रेवाड़ी के बावल में आधुनिक प्लांट
यह प्लांट अपनी तकनीक, क्षमता और स्वचालन के स्तर पर राज्य में सबसे उन्नत होगा।

क्या है SCADA तकनीक और क्यों खास है?
SCADA यानी Supervisory Control And Data Acquisition। यह एक कम्प्यूटर-आधारित प्रणाली है जो—
  • उद्योगों की वास्तविक समय में निगरानी करती है
  • उत्पादन प्रक्रिया को स्वचालित करती है
  • उपकरणों से लगातार डेटा एकत्र करती है
  • गुणवत्ता नियंत्रण और मानकीकरण को बेहतर बनाती है

डेयरी प्लांट में इसका मतलब?
  • दूध की गुणवत्ता सर्वोत्तम
  • मानव त्रुटि कम
  • अधिक स्वच्छ और सुरक्षित उत्पादन
  • तेजी और पारदर्शिता

किसानों को कैसे मिलेगा लाभ?
1. दूध की अधिक खरीद

नए प्लांट से आसपास के जिलों—रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, पलवल—के किसानों का दूध सीधा खरीदा जाएगा।

2. स्थिर और बेहतर कीमत
फेडरेशन द्वारा तय दरों पर दूध बेचना किसानों की आय को स्थिर बनाएगा।

3. रोजगार के नए अवसर
प्लांट संचालन, सप्लाई चेन, परिवहन और तकनीकी सेवाओं में रोजगार बढ़ेगा।

4. गुणवत्ता आधारित भुगतान
स्काडा तकनीक से दूध की गुणवत्ता तुरंत जांची जाएगी, जिससे किसानों को उच्च गुणवत्ता के दूध पर बेहतर दर मिलेगी।

हरियाणा का डेयरी विजन क्या है?
राज्य सरकार का लक्ष्य है-
  • डेयरी सेक्टर में आत्मनिर्भरता
  • दूध उत्पादन में वृद्धि
  • ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना
  • आधुनिक तकनीक से दूध उत्पादों की क्वालिटी में सुधार
  • बावल प्लांट इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।