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Bihar Egg And Fish Production Increased By 260 Percent And 193 Percent In 10 Years
बिहार: 10 साल में अंडा उत्पादन 260 फीसदी, मछली उत्पादन 193 फीसदी और दूध उत्पादन 116 फीसदी बढ़ा
गांव जंक्शन डेस्क, पटना
Published by: Shailesh Arora
Updated Tue, 17 Sep 2024 02:28 PM IST
सार
बिहार में पिछले 10 साल के दौरान अंडा, मछली, दूध और मांस उत्पादन में भारी वृद्धि देखने को मिली है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिहार से 38 हजार मीट्रिक टन मछली पड़ोसी राज्यों को भी भेजी जा रही है। वहीं, अंडा उत्पादन में 10 साल के दौरान 260 फीसदी का इजाफा हुआ है।
बिहार में एक दशक के दौरान दूध, अंडा, मछली और मांस उत्पादन तेजी से बढ़ा है
- फोटो : गांव जंक्शन (प्रतीकात्मक)
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विस्तार
राज्य के कृषि एवं स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया, एक दशक में राज्य का अंडा उत्पादन 260 फीसदी, मछली उत्पादन 193 फीसदी, मांस उत्पादन 120 फीसदी और दूध उत्पादन 116 फीसदी बढ़ा है। कुल सकल राज्य मूल्यवर्धन में पशुपालन और मत्स्यपालन का योगदान मिलाकर 20 फीसदी हो गया है। मंत्री ने कहा, मछली खाने से लोग इंटेलिजेंट होते हैं। मछली खाकर बिहार के लोगों का दिमाग तेज हो रहा है।
38 हजार टन मछली का अन्य राज्यों को निर्यात
पशु व मत्स्य संसाधन मंत्री रेणू देवी ने बताया, बिहार मत्स्य उत्पादन के मामले में सिर्फ आत्मनिर्भर नहीं हुआ, बल्कि निर्यातक भी बना गया है। यहां से 38 हजार टन मछली अन्य राज्यों को निर्यात की जा रही है। मतलब यह कि बिहार अब सिर्फ अपनी आवश्यकता पूरी नहीं कर रहा, बल्कि अन्य राज्यों की भी मछली को लेकर जरूरत पूरी कर रहा है।
1 करोड़ मछलियां नदियों में छोड़ी जाएंगी
वर्ष 2023 से 2028 तक पशु एवं मत्स्य संसाधन विकास के लिए तीन हजार करोड़ रुपये का प्रावधान है। राज्य में 207 हैचरी से जरूरत का 70 फीसदी मछली बीज उत्पादन हो रहा है। एक कार्यक्रम के तहत गंगा की 11 सहायक नदियों में एक करोड़ मछलियां छोड़ी जाएंगी।
पोल्ट्री और मछली पालन सनराइज सेक्टर
विभाग की प्रधान सचिव डॉ एन विजयलक्ष्मी ने बताया, बिहार में 8.79 लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हो रहा है। राज्य में मौजूदा 9 लाख हेक्टेयर चौर क्षेत्र में 10-20 हजार हेक्टेयर चौर क्षेत्र को विकसित करने से मछली उत्पादन में काफी वृद्धि हो सकती है। डॉ विजयलक्ष्मी ने पोल्ट्री एवं मछली पालन को सनराइज सेक्टर बताया। मांस, मछली और अंडा उत्पादन से 85 से 90 हजार करोड़ मिलता है। इसे बढ़ाकर सालाना दो लाख करोड़ किया जा सकता है।
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