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Revive Dry Borewells For Just 5000 This Farmer S Unique Technique Provides 90 000 Liters Of Water Every Day
किसान का अनोखा नवाचार : इस तकनीक से सूखे बोरवेल को मात्र ₹5000 में रिचार्ज करें, जानें...
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Devesh Saraswat
Updated Mon, 05 Jan 2026 12:47 PM IST
सार
सूखते बोरवेल कई किसानों के लिए समस्या बन गए हैं। लेकिन कर्नाटक के एक किसान ने इस समस्या का सस्ता और कारगर समाधान निकाला है। 33 साल के किसान शंकरप्पा आई. सोगाली ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे मात्र 5000 रुपये के खर्च में सूखे बोरवेल को रिचार्ज किया जा सकता है। इस तकनीक के तहत बारिश के पानी को सहेजकर उसे फिल्टर करके सीधे बोरवेल में पहुंचाया जाता है।
बोरवेल के लुढ़कते जलस्तर को रिचार्ज करने का सस्ता तरीका।
- फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
सूखते बोरवेल कई किसानों के लिए समस्या बन गए हैं। लेकिन कर्नाटक के एक किसान ने इस समस्या का सस्ता और कारगर समाधान निकाला है। 33 साल के किसान शंकरप्पा आई. सोगाली ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिससे मात्र 5000 रुपये के खर्च में सूखे बोरवेल को रिचार्ज किया जा सकता है। इस तकनीक के तहत बारिश के पानी को सहेजकर उसे फिल्टर करके सीधे बोरवेल में पहुंचाया जाता है।
पानी इकट्ठा करने के लिए तालाब
सबसे पहले, बोरवेल के पास एक छोटा तालाब बनाया जाता है। इसका मकसद बारिश के बहते हुए पानी को एक जगह इकट्ठा करना है। ध्यान रहे कि यह तालाब लगभग 5x5 फीट और 10 फीट गहरा होता है।
बोरवेल के चारों ओर गड्ढा और फिल्टर
इसके बाद, असली बोरवेल के पाइप के चारों ओर एक और गड्ढा खोदा जाता है। इस गड्ढे के अंदर 2 फीट मोटे बड़े पत्थरों की एक फिल्टर परत बिछाई जाती है।
बोरवेल के मुख्य केसिंग पाइप में मशीन से छोटी-छोटी दरारें काटी जाती हैं और उस पर नायलॉन की जाली लपेट दी जाती है, जिससे मिट्टी या ठोस कण पाइप के अंदर न जा सकें।
सीमेंट के रिंग और दूसरा गड्ढा
अब बोरवेल के चारों ओर सीमेंट के रिंग लगाकर उनके बीच की जगह को सीमेंट से भर दिया जाता है। फिर इस गड्ढे को छोटे पत्थरों से भर दिया जाता है। इसी के पास सीमेंट रिंग से एक और गड्ढा बनाया जाता है, जिसे खाली रखा जाता है और ढक्कन से ढक दिया जाता है।
बारिश के पानी वाले तालाब से इस खाली गड्ढे तक एक 3 इंच का पाइप लगाया जाता है। जब बारिश होती है तो पानी तालाब में जमा होता है, वहां से पाइप के जरिए पहले खाली गड्ढे में आता है, फिर पत्थरों की परतों से फिल्टर होता हुआ बोरवेल के पाइप तक पहुंचता है और दरारों के माध्यम से सीधे जमीन के अंदर जाकर भूजल स्तर को बढ़ा देता है।
सिर्फ 5000 का खर्च में फायदे
इस तकनीक को लागू करने की कुल लागत मात्र 5000 रुपये बताई गई है। इस विधि से हर दिन लगभग 90,000 लीटर भूजल रिचार्ज होता है। बोरवेल में पानी का स्तर और आउटपुट बढ़ जाता है।
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