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पूसा कम्पोस्ट टर्नर-कम-मिक्सर : किसानों के लिए पराली प्रबंधन और जैविक खाद उत्पादन का आधुनिक समाधान

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 22 Sep 2025 06:15 PM IST
सार

विशेषज्ञों का कहना है कि पूसा कम्पोस्ट टर्नर-कम-मिक्सर मशीन के बड़े पैमाने पर उपयोग से किसानों की आय में वृद्धि होगी और पराली जलाने की समस्या से भी निजात मिलेगी। सरकार और कृषि विभाग किसानों को इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
 

पूसा कम्पोस्ट टर्नर-कम-मिक्सर
पूसा कम्पोस्ट टर्नर-कम-मिक्सर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) ने किसानों के लिए एक अत्याधुनिक मशीन विकसित की है, जिसका नाम पूसा कम्पोस्ट टर्नर-कम-मिक्सर है। यह मशीन पराली और अन्य कृषि अवशेषों को जलाने के बजाय उन्हें उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद (कम्पोस्ट) में बदलने के लिए एक वैज्ञानिक और आर्थिक विकल्प प्रदान करती है।

मशीन ऐसे करती है काम
विशेषज्ञों के अनुसार, यह मशीन चावल के भूसे और अन्य फसल बायोमास के मिश्रण को कुशलतापूर्वक तैयार करती है। विंडरो (खाद की लंबी ढेरियां) में धान का भूसा, गोबर, अच्छी गुणवत्ता वाली मिट्टी और पुरानी खाद को क्रमशः 8:1:0.5:0.5 के अनुपात में मिलाया जाता है। इन ढेरों को समलम्बाकार (ट्रेपेजियम आकार) में रखा जाता है, जिसकी निचली चौड़ाई 2 मीटर और ऊपरी चौड़ाई 1.5 मीटर होती है। यह डिजाइन मशीन के रोटर की चौड़ाई से मेल खाता है, जिससे सामग्री का सही ढंग से पलटना और मिलाना संभव हो पाता है।

मशीन की विशेषताएं
मशीन में एक अंतर्निर्मित छिड़काव प्रणाली लगी है, जिसके माध्यम से पूसा कम्पोस्ट इनोक्युलेंट मिलाया जाता है। इनोक्युलेंट और नियमित पलटाई से खाद में सूक्ष्मजीव सक्रिय रहते हैं, जिससे अपघटन की प्रक्रिया तेज होती है। मशीन के उपयोग से विंडरो में उचित वातन और इष्टतम तापमान बना रहता है, जो उच्च गुणवत्ता वाली खाद बनाने के लिए आवश्यक है। इसकी क्षमता लगभग 5 टन प्रतिदिन है, जो बड़े पैमाने पर किसानों और सहकारी समितियों के लिए उपयोगी है।
  • स्वचालित बेल्ट फीडिंग सिस्टम और कम्पोस्ट विभाजक इकाई। 
  • तैयार कम्पोस्ट को अलग-अलग आकार में छांटने और ले जाने के लिए बेल्ट कन्वेयर यूनिट।
  • 70 हॉर्सपावर ट्रैक्टर से चलने योग्य, 1000 टन/घंटा क्षमता।
  • टर्नर को उठाने-बैठाने के लिए हाइड्रोलिक तंत्र।
  • बायोमास पर छिड़काव के लिए पानी की टंकी।
  • PTO पावर से संचालित टर्निंग और मिक्सिंग।

किसानों को होने वाले लाभ
इस मशीन के इस्तेमाल से किसानों को पारंपरिक गड्ढा विधि की तुलना में 75 दिन की समय बचत होती है। प्रति टन लगभग 2700 रुपये की लागत में कमी आती है। प्रति वर्ष 10-15 लाख रुपये तक की अतिरिक्त आय संभव है।

पराली जलाने की समस्या का समाधान
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तकनीक के माध्यम से धान की पराली को जलाने की समस्या का भी समाधान मिलेगा। पराली जलाने से न सिर्फ मिट्टी की उर्वरता घटती है, बल्कि प्रदूषण भी बढ़ता है। पूसा कम्पोस्ट टर्नर-कम-मिक्सर के जरिए पराली को खाद में बदलकर किसानों को अतिरिक्त आय का स्रोत भी मिल सकता है। सरकार और कृषि विभाग किसानों को इस मशीन के बारे में जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चला रहे हैं। उम्मीद है कि इस तकनीक के व्यापक उपयोग से प्रदूषण कम होगा और किसानों को सस्ती तथा गुणवत्तापूर्ण जैविक खाद उपलब्ध हो सकेगी।