पावर वीडर : खरपतवार हटाने से लेकर मिट्टी सुधार तक, किसानों का भरोसेमंद यंत्र
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Thu, 11 Sep 2025 06:55 PM IST
सार
खेती में खरपतवार हमेशा से किसानों के लिए समस्या रहे हैं। पावर वीडर घूमने वाले ब्लेड और कांटों की मदद से इन अवांछित पौधों को जड़ से उखाड़ देता है। इससे न केवल फसलों की वृद्धि में बाधा कम होती है, बल्कि महंगे और हानिकारक रसायनों पर निर्भरता भी घटती है।
पावर वीडर आधुनिक कृषि का बहुमुखी साथी
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
खेती-किसानी को टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए किसानों को निरंतर नई तकनीकों को अपनाना पड़ता है। इन्हीं तकनीकों में एक है पावर वीडर, यह ऐसा कृषि उपकरण, जो खेतों में खरपतवार प्रबंधन से लेकर मिट्टी की गुणवत्ता सुधार तक में अहम योगदान देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पावर वीडर का सही इस्तेमाल किसानों की उत्पादकता बढ़ाने और श्रम की लागत घटाने में गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
खरपतवार प्रबंधन में कारगर
खेती में खरपतवार हमेशा से किसानों के लिए समस्या रहे हैं। पावर वीडर घूमने वाले ब्लेड और कांटों की मदद से इन अवांछित पौधों को जड़ से उखाड़ देता है। इससे न केवल फसलों की वृद्धि में बाधा कम होती है, बल्कि महंगे और हानिकारक रसायनों पर निर्भरता भी घटती है। यह मशीन विशेष रूप से उन फसलों के लिए उपयोगी है जो कतारों में बोई जाती हैं। पावर वीडर पंक्तियों के बीच उगे खरपतवारों को नियंत्रित करता है और मुख्य फसल को नुकसान पहुंचाए बिना मिट्टी को ढीला करता है। इसकी मदद से किसान अंतर-फसली खेती में भी बेहतर परिणाम पा सकते हैं।
मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार
विशेषज्ञों के अनुसार, पावर वीडर का एक और महत्वपूर्ण लाभ है मिट्टी का वातन। मशीन की जुताई से मिट्टी में हवा, पानी और पोषक तत्वों का प्रवाह बेहतर होता है। इससे जड़ों की वृद्धि तेज होती है और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। जिन किसानों ने रसायन-मुक्त खेती अपनाई है, उनके लिए पावर वीडर किसी वरदान से कम नहीं। यह उपकरण पूरी तरह से जैविक पद्धतियों के अनुरूप है और खेतों को बिना शाकनाशी के खरपतवार-मुक्त बनाए रखता है।
श्रम-लागत में बचत और कीमत
परंपरागत तरीकों से खरपतवार नियंत्रण श्रम-प्रधान और समय लेने वाला काम है। वहीं, पावर वीडर बड़े खेतों को कम समय में तैयार कर देता है। किसानों का कहना है कि इससे मजदूरी का खर्च घटता है और खेती अधिक लाभकारी हो जाती है। खरपतवार कम होने और मिट्टी की स्थिति सुधरने से फसलों को पर्याप्त पोषण मिलता है। परिणामस्वरूप, उपज बढ़ती है और किसान खाद्य सुरक्षा में योगदान दे पाते हैं। यही कारण है कि पावर वीडर को आधुनिक खेती का भरोसेमंद साथी कहा जा रहा है। कीमत की अगर बात करें तो यह मशीन 20 हजार रुपये से शुरू होकर डेढ़ लाख रुपये तक में है।
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