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Research: शुगर समेत कई गंभीर बीमारियों के लिए वरदान है आलू-केले के छिलकों से बना रेसिस्टेंट स्टार्च, जानें

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Mon, 06 Oct 2025 07:52 AM IST
सार

रेसिस्टेंट स्टार्च एक विशेष प्रकार का कार्बोहाइड्रेट है, जो छोटी आंत में नहीं पचता और सीधे बड़ी आंत में पहुंच जाता है। यह बड़ी आंत के लाभकारी बैक्टीरिया के लिए प्रीबायोटिक की तरह काम करता है।

आलू केले का छिलका भी है फायदेमंद
आलू केले का छिलका भी है फायदेमंद - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

अक्सर कचरा समझकर फेंके जाने वाले आलू और केले के छिलके, चावल की भूसी और अन्य कृषि अपशिष्ट अब सेहत सुधारने में काम आ सकते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इनसे रेसिस्टेंट स्टार्च तैयार करने की तकनीक विकसित की है। यह स्टार्च ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है, आंतों के लिए फायदेमंद है और लंबे समय तक भूख नहीं लगने में मदद करता है। यह शोध विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रदीप कुमार ने किया है। उनके काम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है और इसे शोध पत्रिका बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी में प्रकाशित किया गया है।

कैसे तैयार होता है रेसिस्टेंट स्टार्च
डॉ. प्रदीप ने बताया कि उन्होंने रेसिस्टेंट स्टार्च बनाने में एंजाइम तकनीक, अल्ट्रासाउंड विधि और थर्मल प्रोसेसिंग जैसी पर्यावरण अनुकूल ग्रीन टेक्नोलॉजी का उपयोग किया है। यह तरीका सरल और किफायती है, जबकि वर्तमान में उपलब्ध ज्यादातर तकनीकें जटिल और महंगी हैं।

क्या है रेसिस्टेंट स्टार्च?
रेसिस्टेंट स्टार्च एक विशेष प्रकार का कार्बोहाइड्रेट है, जो छोटी आंत में नहीं पचता और सीधे बड़ी आंत में पहुंच जाता है। यह बड़ी आंत के लाभकारी बैक्टीरिया के लिए प्रीबायोटिक की तरह काम करता है।

इसके फायदे क्या हैं?
  • ब्लड शुगर कंट्रोल
  • बेहतर इंसुलिन संवेदनशीलता
  • आंतों और पाचन स्वास्थ्य में सुधार
  • आलू, हरे केले, फलियां और ओट्स जैसे खाद्य पदार्थों में स्वाभाविक रूप से रेसिस्टेंट स्टार्च पाया जाता है।

पर्यावरण और सेहत दोनों को फायदा
लविवि के प्रवक्ता डॉ. मुकुल श्रीवास्तव ने कहा कि इस तरह के शोध से न सिर्फ खाद्य अपशिष्ट का सही उपयोग संभव है बल्कि इससे पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य दोनों में बड़ा योगदान मिलेगा।