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Towards Sustainable Agriculture Return To Past Reveals Potential For Soil Regeneration
टिकाऊ खेती के लिए, अतीत की ओर वापसी : मिट्टी को पुनर्जीवित करने की क्षमता का हुआ खुलासा
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sun, 26 Oct 2025 01:18 PM IST
सार
एक नए अध्ययन में पता चला है कि पुरातन पौधे मिट्टी के भीतर विविध सूक्ष्मजीवों को पोषित करते हैं, जो टिकाऊ खेती और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
मिट्टी को पुनर्जीवित करने की क्षमता का हुआ खुलासा
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
प्राकृतिक रूप से उगने वाली पुरातन फसलें (Ancient Crops) केवल हमारी आनुवंशिक विरासत (Genetic Heritage) का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ये मिट्टी को पुनर्जीवित करने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। हाल ही में प्रकाशित एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में यह खुलासा हुआ है कि ऐसी फसलें मिट्टी के भीतर सूक्ष्मजीवों (Microbes) की विविधता को बढ़ाती हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता, कार्बन संरक्षण और जलवायु लचीलापन में सुधार हो सकता है।
यह अध्ययन शोध पत्रिका ‘आईएसएमई कम्युनिकेशन्स’ (ISME Communications) में प्रकाशित हुआ है। इसमें भारत के हैदराबाद विश्वविद्यालय सहित 11 देशों के 25 वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया। अध्ययन का केंद्र कंगनी (Foxtail Millet) की पारंपरिक किस्में थीं, जिन्हें खेतों में उगाकर उनके मिट्टी के स्वास्थ्य पर प्रभाव का विश्लेषण किया गया।
कैसे मदद करती हैं पुरातन फसलें?
शोधकर्ताओं के अनुसार, इन फसलों की जड़ संरचना (Root Structure) और प्राकृतिक अनुकूलन क्षमता (Adaptability) ऐसी होती है कि वे मिट्टी में मौजूद लाभकारी जीवाणुओं को सक्रिय करती हैं। ये सूक्ष्मजीव न केवल पौधों को पोषण देते हैं बल्कि मिट्टी की नमी और जैविक कार्बन को भी स्थिर रखते हैं। इससे खेतों में कम सिंचाई और उर्वरक उपयोग के बावजूद बेहतर उत्पादन संभव हो सकता है।
मिट्टी और जलवायु के लिए नई उम्मीद
अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता प्रोफेसर अप्पा राव पोडिले (हैदराबाद विश्वविद्यालय) का कहना है कि यह खोज मिट्टी की उर्वरता और स्थिरता बढ़ाने के लिए प्रकृति आधारित समाधान (Nature-based Solutions) खोजने की दिशा में एक नई राह खोल सकती है। यह शोध न केवल सतत कृषि (Sustainable Agriculture) को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन और भूमि क्षरण जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में भी सहायक सिद्ध हो सकता है।
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