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किसानों को नए साल का तोहफा: मक्का-गेहूं-सेब समेत 16 नई किस्में लॉन्च, बंपर पैदावार मिलेगी, खूब होगी कमाई

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Fri, 26 Dec 2025 12:28 PM IST
सार

SKUAST के वैज्ञानिकों के अनुसार, ये किस्में केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पोषण सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन और टिकाऊ कृषि को भी मजबूती देंगी।

मक्का गेहूं
मक्का गेहूं - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। शेर-ए-कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (SKUAST) ने मक्का, गेहूं, चावल, दालें, सेब, जई और तिलहन की कुल 16 नई जलवायु-अनुकूल, अधिक पैदावार देने वाली और पोषक तत्वों से भरपूर किस्में जारी की हैं। विश्वविद्यालय का कहना है कि ये किस्में बदलते मौसम के बीच खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय और उत्पादन स्थिरता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगी। इन किस्मों को जम्मू स्थित सिविल सचिवालय में आयोजित राज्य बीज उप-समिति की 10वीं बैठक में मंजूरी दी गई। कृषि उत्पादन विभाग की अध्यक्षता में हुई इस बैठक के बाद इन किस्मों को आधिकारिक तौर पर किसानों के लिए जारी किया गया।

किन फसलों की नई किस्में हुईं जारी
SKUAST द्वारा जिन 16 किस्मों को मंजूरी मिली है, उनमें शामिल हैं...
  • मक्का की 6 किस्में
  • सेब (अंबरी) के 2 चयन
  • दालों की 4 किस्में
  • चावल, गेहूं, जई और तिलहन की 1-1 किस्म

इन किस्मों को खास तौर पर जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक परिस्थितियों, कम तापमान, सीमित फसल अवधि और मौसम में तेजी से हो रहे बदलावों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।

शालीमार राइस-10: पारंपरिक स्वाद के साथ आधुनिक तकनीक
चावल की प्रमुख किस्मों में शालीमार राइस-10 को खास माना जा रहा है। यह पारंपरिक मुश्कबुदजी चावल का जल्दी पकने वाला और ब्लास्ट रोग-रोधी संस्करण है। इसे मार्कर-असिस्टेड सिलेक्शन तकनीक से विकसित किया गया है, जिससे कम समय में बेहतर उपज और स्थिर उत्पादन संभव होगा।

शालीमार व्हीट-4: कम समय में बेहतर गेहूं उत्पादन
गेहूं की नई किस्म शालीमार व्हीट-4 को बहुत जल्दी पकने वाली किस्म के रूप में पेश किया गया है। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाना है, जहां फसल अवधि छोटी होती है। यह किस्म खासकर पहाड़ी और ठंडे इलाकों के किसानों के लिए उपयोगी मानी जा रही है।

सेब की हाई-डेंसिटी अंबरी किस्में
बागवानी क्षेत्र में भी SKUAST ने बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने शालीमार अंबरी-01 और शालीमार अंबरी-02 नाम की दो हाई-डेंसिटी सेब किस्में जारी की हैं। इन किस्मों में बेहतर सुगंध, लंबी शेल्फ लाइफ, आधुनिक हाई-डेंसिटी बागवानी प्रणालियों के लिए उपयुक्तता की खासियत है। इनसे सेब उत्पादकों को प्रति हेक्टेयर अधिक उत्पादन और बेहतर बाजार मूल्य मिलने की उम्मीद है।

मक्का में सबसे बड़ा विस्तार, 6 नई किस्में
इस पहल में सबसे बड़ा फोकस मक्का पर रहा है। SKUAST ने मक्का की छह नई किस्में पेश की हैं, जिनमें...
  • पूसा शालीमार QPMH-1: प्रोटीन से भरपूर क्वालिटी प्रोटीन मक्का
  • शालीमार मेज कम्पोजिट-10: क्षेत्र की पहली कैरोटीनॉयड-समृद्ध किस्म
  • शालीमार मेज हाइब्रिड-7: जल-जमाव सहनशील किस्म
  • एक उच्च ऊंचाई के लिए उपयुक्त विशेष हाइब्रिड
  • एक बेबी कॉर्न हाइब्रिड
  • एक उच्च उपज वाली सामान्य हाइब्रिड
ये किस्में खासकर उन किसानों के लिए राहत लेकर आई हैं, जो पिछले कुछ वर्षों से मौसम की अनिश्चितता और उत्पादन जोखिम से जूझ रहे हैं।

खाद्य सुरक्षा और जलवायु अनुकूलन की दिशा में बड़ा कदम
SKUAST के वैज्ञानिकों के अनुसार, ये किस्में केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पोषण सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन और टिकाऊ कृषि को भी मजबूती देंगी। विश्वविद्यालय का मानना है कि इन नई किस्मों के माध्यम से जम्मू-कश्मीर में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को ज्यादा प्रतिरोधी बनाने में मदद मिलेगी।