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Research: हिमालय के जंगलों में खोजी गई मशरूम की नई प्रजाति, जैव विविधता के लिए अहम खोज

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 02 Feb 2026 02:16 PM IST
सार

हेमिलेसीनम इंडिकम मशरूम बांज की जड़ों के बाहर रहता है। यह बांज की जड़ों के चारों ओर एक परत बना लेता है। इस तरह, यह मशरूम बांज की जड़ों के साथ सहजीवी संबंध बनाता है, जो पोषक तत्वों के आदान-प्रदान और जंगल को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक है। इसकी पहचान हिमालयी जंगलों के पारिस्थितिक संरक्षण के महत्व को उजागर करती है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हिमालय के समशीतोष्ण वनों में वैज्ञानिकों ने मशरूम की एक नई और अनोखी प्रजाति की खोज की है, जिसे हेमिलेसीनम इंडिकम (Hemileccinum indicum) नाम दिया गया है। यह प्रजाति उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में समुद्र तल से लगभग 2600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित बांज (ओक) के जंगलों में पाई गई है। यह खोज हिमालयी क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता और पारिस्थितिक महत्व को एक बार फिर रेखांकित करती है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह मशरूम बोलेट समूह से संबंधित है, लेकिन अपने भौतिक और आनुवंशिक गुणों के कारण यह अब तक ज्ञात प्रजातियों से अलग साबित हुई है। इसकी टोपी झुर्रीदार बैंगनी-भूरे रंग की होती है, जबकि इसके छिद्र हल्के पीले रंग के हैं। इन्हीं विशेषताओं के कारण यह मशरूम उत्तरी अमेरिका और चीन में पाई जाने वाली समान प्रजातियों से अलग पहचाना गया।

इस प्रजाति की पुष्टि आनुवंशिक अनुक्रमण (जेनेटिक सीक्वेंसिंग) और इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए की गई है। यह अध्ययन बॉटनिकल सर्वे ऑफ इंडिया, इटली के टोरिनो विश्वविद्यालय और सेंट जेवियर्स कॉलेज, झारखंड के वैज्ञानिकों के सहयोग से किया गया।

हेमिलेसीनम इंडिकम बांज के पेड़ों की जड़ों के बाहर रहता है और जड़ों के चारों ओर एक परत बनाकर सहजीवी संबंध स्थापित करता है। इस सहजीवन के जरिए मशरूम और पेड़ के बीच पोषक तत्वों का आदान-प्रदान होता है, जिससे जंगल की सेहत और मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की खोजें हिमालयी वनों के संरक्षण की आवश्यकता को और मजबूत करती हैं। नई प्रजातियों की पहचान न केवल जैव विविधता को समझने में मदद करती है, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है।