नई रिसर्च : करेले में रोगों की पहचान करेगा एआई टूल, जानें
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sun, 07 Sep 2025 12:46 PM IST
सार
डीप लर्निंग मॉडल पर आधारित यह टूल स्मार्टफोन से ली गई तस्वीरों से डाउनी मिल्ड्यू व लीफ स्पॉट जैसे रोगों, जैसिड कीट के प्रकोप और नाइट्रोजन, पोटैशियम व मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों की कमी का त्वरित निदान कर सकता है।
करेले में रोगों की पहचान करेगा एआई टूल
- फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू), रोहतक के शोधकर्ताओं ने करेले की पत्तियों में रोगों और पोषक तत्वों की कमी का पता लगाने के लिए नया एआई आधारित वेब-एप्लिकेशन 'एग्रीक्योर' विकसित किया है। डीप लर्निंग मॉडल पर आधारित यह टूल स्मार्टफोन से ली गई तस्वीरों से डाउनी मिल्ड्यू व लीफ स्पॉट जैसे रोगों, जैसिड कीट के प्रकोप और नाइट्रोजन, पोटैशियम व मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्वों की कमी का त्वरित निदान कर सकता है।
अंतरराष्ट्रीय जेनेटिक इंजीनियरिंग और बायोटेक्नोलॉजी केंद्र, नई दिल्ली के सहयोग से किया गया यह अध्ययन 'करंट प्लांट बायोलॉजी' में प्रकाशित हुआ है। इसे ऑफलाइन उपयोग के लिए तैयार किया जाएगा, ताकि इसका उपयोग अनाज, दालों व फलों में भी किया जा सके।
रोहतक स्थित एमडीयू के कुलपति प्रो. राजबीर सिंह कहते हैं, "यह नई तकनीक किसानों के लिए वरदान साबित होगी। इसे ड्रोन और आईओटी उपकरणों से जोड़ने की योजना है, ताकि बड़े पैमाने पर फसलों की निगरानी की जा सके।"
देश में करेले की फसल दो बार उगाई जाती है। खासकर गर्मी और बारिश में। यह पोषण से भरपूर है, शुगर मरीजों के लिए इसे बेहद मुफीद माना जाता है और इसकी मांग बनी रहती है। मध्य प्रदेश करेला उत्पादन में सबसे आगे है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, एमपी के किसान हर साल करीब 2.30 टन करेले का उत्पादन करते हैं। दूसरे स्थान पर छत्तीसगढ़ और तीसरे पर तमिलनाडु है।
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