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UP: गन्ने के साथ Intercropping खेती से बदलेगा यूपी का कृषि भविष्य, किसानों की आय होगी कई गुना-CM योगी

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 02 Feb 2026 03:38 PM IST
सार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई ऊंचाई पर ले जाने का सबसे प्रभावी रास्ता गन्ने के साथ तिलहनी और दलहनी अंतःफसली खेती को मिशन मोड में लागू करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मॉडल किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि कई गुना बढ़ाने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

उत्तर प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गन्ने के साथ तिलहनी और दलहनी अंतः फसली (Intercropping)
खेती को मिशन मोड में लागू करने पर जोर देते हुए कहा है कि यह मॉडल किसानों को अतिरिक्त उत्पादन, स्थिर आय और कम जोखिम के साथ आर्थिक मजबूती प्रदान करेगा। इस पहल से न सिर्फ गन्ना किसानों की आमदनी बढ़ेगी, बल्कि प्रदेश को तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है। ऐसे में ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इकाई क्षेत्रफल से अधिक उत्पादन ही एकमात्र विकल्प है। गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल किसानों को अतिरिक्त उत्पादन, कम लागत और पूरे वर्ष स्थिर आय उपलब्ध कराती है। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है, बल्कि एकल फसल पर निर्भरता से होने वाला जोखिम भी कम होता है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी क्षेत्र शामिल है। यदि इस बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल को योजनाबद्ध तरीके से जोड़ा जाए, तो प्रदेश और देश दोनों को तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी मदद मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू किया जाए और इसके लिए वर्षवार स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाए। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों की मदद से वैज्ञानिक और व्यावहारिक आधार पर फसलों का चयन करने को कहा। आईआईएसआर की सिफारिशों के अनुसार रबी मौसम में सरसों और मसूर तथा जायद में उर्द और मूंग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ने की पैदावार को प्रभावित किए बिना अतिरिक्त फसल, अतिरिक्त लाभ और अतिरिक्त सुरक्षा—यही इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने यह भी जोर दिया कि योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए सहायता और अनुदान की व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए। बड़े पैमाने पर अंतःफसली खेती अपनाने से किसानों को तेज नकदी प्रवाह मिलेगा, कृषि अधिक टिकाऊ बनेगी और राज्य के सकल मूल्य वर्धन (GVA) में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।