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जीएम फसलों से खुल सकती है तरक्की की राह : विरोध के चलते बाधित हुआ आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों का विकास

उमशंकर मिश्र, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Sat, 13 Sep 2025 07:08 PM IST
सार

भारत में बीटी कपास आने के बाद दूसरी जीएम फसलों का व्यावसायीकरण सामाजिक व राजनीतिक विरोध और नियामक बाधाओं के कारण बाधित हुआ है। एक ताजा अध्ययन में जीएम फसलों की राह की बाधाओं, खामियों और उपयोगिता के विश्लेषण के बाद शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं। 

भारत में जीएम फसलों पर नई रिपोर्ट
भारत में जीएम फसलों पर नई रिपोर्ट - फोटो : AI

विस्तार

आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलों (GM CROPS) की अपनी उपयोगिता है और ये फसलें खाद्य सुरक्षा से लेकर पर्यावरणीय चुनौतियों से लड़ने और किसानों की आय बढ़ाने में बड़ा योगदान दे सकती हैं।

भारत में बीटी कपास आने के बाद अन्य जीएम फसलों का व्यावसायीकरण सामाजिक एवं राजनीतिक विरोध और नियामक बाधाओं के कारण बाधित हुआ है। एक ताजा अध्ययन में जीएम फसलों की राह में आने वाली बाधाओं, इसकी खामियों और उपयोगिता के विश्लेषण के बाद शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुंचे हैं। 

बीटी कपास, बीटी बैंगन और जीएम सरसों की केस स्टडीज पर आधारित इस अध्ययन से पता चला है कि जीएम फसलों के कई फायदे हैं, जिसमें उच्च उपज और कीट प्रतिरोध जैसे लाभ शामिल है। लेकिन, जैव सुरक्षा ढांचे व जन-जागरूकता के अभाव और नियामक अनिश्चितताएं इसकी राह में बाधा बन रही हैं।

भारत में जैव प्रौद्योगिकी की चुनौतियों पर नई स्वॉट (ताकत, कमजोरी, अवसर, खतरे) रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। जीएम को खाद्य सुरक्षा की मजबूती के लिए अवसर बताया गया है। वहीं, जैव विविधता के नुकसान और इसके नैतिक विरोध को एक बाधा करार दिया गया है।

तेलंगाना के आचार्य एन.जी. रंगा कृषि विश्विविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में पाया है कि मजबूत जैव सुरक्षा तंत्र, सरल नियमन, पारदर्शी फील्ड ट्रायल और जन-भागीदारी से ही कृषि जैव प्रौद्योगिकी में प्रगति हो सकती है। इससे किसानों को भी फायदा हो सकता है।