Home›Baat Pate Ki›Janch Parakh›
Aerosol Transmission Of Nipah Virus Confirmed In Kerala Outbreaks Scientists Warn
Research Report: हवा से भी फैल सकता है निपाह वायरस, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी, डराने वाली रिपोर्ट
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Sun, 31 Aug 2025 06:38 PM IST
सार
एनआईवी पुणे की वैज्ञानिक डॉ. प्रियंका यादव (मुख्य शोधकर्ता) ने कहा कि यह खोज दिखाती है कि निपाह को रोकने के लिए पहले से भी ज्यादा सतर्कता बरतनी होगी।
निपाह वायरस
- फोटो : सोशल मीडिया
Link Copied
विस्तार
निपाह वायरस को लेकर एक नया खुलासा हुआ है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी), पुणे और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिकों ने अपने शोध में पाया है कि निपाह वायरस केवल सीधे संपर्क से ही नहीं, बल्कि हवा के छोटे-छोटे कणों (एरोसोल) के ज़रिए भी फैल सकता है।
बता दें कि निपाह वायरस एक खतरनाक संक्रमण है, जो चमगादड़ों से इंसानों में आता है और फिर इंसानों के बीच फैल सकता है। इसके लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ और तेज़ संक्रमण शामिल हैं। गंभीर स्थिति में यह एन्सेफलाइटिस (दिमाग का संक्रमण) तक पैदा कर सकता है। इसकी मृत्यु दर बहुत अधिक होती है, इसलिए यह वायरस हमेशा चिंता का विषय रहा है।
रिसर्च में क्या पाया गया?
वैज्ञानिकों ने 2018 और 2023 में केरल में हुए निपाह प्रकोप का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि
संक्रमित मरीजों के आस-पास की हवा में वायरस के एरोसोल कण मौजूद थे। इसका मतलब यह है कि यदि कोई व्यक्ति संक्रमित मरीज के पास लंबे समय तक रहे, तो उसे सांस के ज़रिए भी संक्रमण हो सकता है। अब तक यह माना जाता था कि निपाह मुख्य रूप से शरीर के तरल पदार्थ या बहुत नज़दीकी संपर्क से फैलता है। लेकिन यह नई जानकारी संक्रमण के दायरे को और गंभीर बनाती है।
क्यों है यह खतरनाक?
अगर निपाह वायरस हवा के जरिए फैलता है तो:
अस्पतालों और घरों में संक्रमण का खतरा बहुत बढ़ जाता है। हेल्थ वर्कर्स, मरीज के परिवार और आस-पास रहने वाले लोग ज़्यादा जोखिम में आ जाते हैं। संक्रमण को रोकने के लिए केवल व्यक्तिगत सुरक्षा (जैसे मास्क और पीपीई) ही नहीं, बल्कि अच्छी वेंटिलेशन और आइसोलेशन व्यवस्था भी जरूरी हो जाती है।
वैज्ञानिकों ने क्या कहा?
एनआईवी पुणे की वैज्ञानिक डॉ. प्रियंका यादव (मुख्य शोधकर्ता) ने कहा कि यह खोज दिखाती है कि निपाह को रोकने के लिए पहले से भी ज्यादा सतर्कता बरतनी होगी। उन्होंने बताया कि एरोसोल मार्ग से फैलने का खतरा अस्पतालों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में और बढ़ सकता है।
आम लोगों के लिए सावधानी
चमगादड़ों के संपर्क में आने से बचें।
संक्रमित मरीज के पास जाने पर मास्क और सैनिटाइज़र का उपयोग करें।
अगर बुखार, सिरदर्द और सांस की तकलीफ जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत जांच कराएं।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।