Home Baat Pate Ki Agricultural Drones Are New Gadget Of Smart And Precise Farming Will Be A Big Weapon In Future Farming

Agri Drone: स्मार्ट और सटीक खेती का नया गैजेट बन रहे कृषि ड्रोन, भविष्य की खेती में होंगे बड़ा हथियार

डॉ. उमाशंकर मिश्र, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Sat, 12 Apr 2025 11:51 AM IST
सार

Agricultural Drones: बैलों से चलने वाले हल से जीपीएस-निर्देशित ट्रैक्टर तक कृषि क्षेत्र ने हमेशा नई तकनीक को अपनाया है। खेती-बाड़ी में ड्रोन का उपयोग कृषि प्रौद्योगिकी की नई छलांग है। पैदावार बढ़ाने, समय की बचत और श्रम एवं संसाधनों की लागत कम करने में ड्रोन मददगार साबित हो रहे हैं। सरकार भी ड्रोन को बढ़ावा दे रही है। आने वाले 5-7 सालों में ड्रोन का उपयोग 80 फीसदी तक पहुंचने की उम्मीद। इस स्तर ट्रैक्टर्स को पहुंचने में 20 साल लग गए थे। 

ड्रोन से उर्वरकों का छिड़काव।
ड्रोन से उर्वरकों का छिड़काव। - फोटो : गांव जंक्शन

विस्तार

खेती-बाड़ी में ड्रोन का उपयोग बढ़ रहा है। कृषि ड्रोन न केवल खेती-बाड़ी के तौर-तरीकों को बदल रहे हैं, बल्कि सधी और सटीक खेती के जरिये कम लागत में बेहतर उपज प्राप्त करने में किसानों की मदद भी कर रहे हैं। गरुड़ एयरोस्पेस के संस्थापक और सीईओ अग्निश्वर जयप्रकाश ने कुछ समय पहले बताया था कि लगभग 7,000 ड्रोन्स के बेड़े के साथ, भारतीय कृषि ड्रोन का बाजार, जिसका वर्तमान मूल्य 14.54 करोड़ डॉलर है, 2030 तक 63.14 करोड़ डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है। 

सटीक और सधी हुई खेती का जरिया ड्रोन
ड्रोन के उपयोग से उर्वरकों एवं कीटनाशकों के छिड़काव के लिए श्रमिकों की कमी का सामना नहीं करना पड़ता। ड्रोन्स के उपयोग से अब नियंत्रित तरीके-से बेहद नपा-तुला छिड़काव कर सकते हैं। ड्रोन सटीक खेती (Precision Farming) का बड़ा जरिया बनकर उभरे हैं, और खेती-बाड़ी से जुड़े कार्यों की दक्षता बढ़ा रहे हैं। खेत में इनके उपयोग से इनपुट्स की बर्बादी नहीं होती और किसानों की सेहत के साथ-साथ पौधों और पर्यावरण पर भी रसायनों का अनावश्यक बोझ नहीं पड़ता। 

पैदावार में 30% वृद्धि कर सकते हैं ड्रोन
गरुड़ एयरोस्पेस की वेबसाइट के अनुसार, उनके ड्रोन का उपयोग करके फसल की पैदावार में 30% वृद्धि कर सकते हैं। नमो ड्रोन दीदी योजना से जुड़े किसानों को कृषि प्रबंधन में 40-60% समय की बचत भी हो सकती है। साथ ही, यह योजना ग्रामीण किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए वित्तीय अवसर पैदा कर सकती है। गरुड़ एयरोस्पेस के अनुसार, किसान श्रम और संसाधनों की लागत में 30-50% की कमी कर सकते हैं। भारत सरकार को उम्मीद है कि महिलाओं के नेतृत्व वाले समूह किसानों को ड्रोन किराए पर देकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। 

5-7 वर्षों में 80 फीसदी तक हो जाएगा ड्रोन का उपयोग
ड्रोन किसानों के लिए एक जरूरी उपकरण बनने के लिए तैयार हैं, जो भविष्य में अधिक कुशल, टिकाऊ और लाभदायक कृषि सुनिश्चित करेंगे। अनुमान है कि अगले 5-7 वर्षों में भारतीय कृषि में ड्रोन का उपयोग मौजूदा लगभग एक फीसदी से बढ़कर 80% तक पहुंच जाएगा। जबकि, ट्रैक्टरों को 80% के स्तर तक पहुंचने में लगभग 20 साल लगे थे। वर्तमान में, बाजार पर 35-40 ड्रोन कंपनियों का दबदबा है। वर्ष 2030-31 तक कुल बेड़े के 6-7 लाख ड्रोन तक पहुंचने की उम्मीद है। 

कृषि में ड्रोन्स (Drones in Agriculture)
  • फसल प्रबंधन (Crop Management): उन्नत ड्रोन इमेजिंग का उपयोग करके फसल की निगरानी और पौधों में तनाव पैदा करने वाले कारकों की सटीक पहचान। ड्रोन बड़े क्षेत्र में सटीक और वास्तविक समय में डेटा शीघ्रता से प्रदान करते हैं। इमेजिंग और डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करके ड्रोन्स अधिक सटीक तरीके के साथ फसल उपज का पूर्वानुमान दे सकते हैं। निगरानी और एआई मैपिंग के माध्यम से ड्रोन्स खरपतवार वृद्धि की पहचान और प्रबंधन में भी सहायक हैं। ड्रोन पर लगे सेंसर्स रोग या कीटों के प्रकोप का शीघ्र पता लगा सकते हैं और उनकी रोकथाम कर सकते हैं। 
  • मृदा एवं जल प्रबंधन (Soil and Water Management): ड्रोन-आधारित इमेजिंग के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता और नमी के स्तर जैसे गुणों का आकलन कर सकते हैं। 
  • पशुधन प्रबंधन (Livestock Management): पशुधन के स्वास्थ्य, स्थान और आवागमन को कुशलतापूर्वक ट्रैक और प्रबंधित करें। बिना किसी व्यवधान के निरंतर, वास्तविक समय की निगरानी प्रदान करता है। 
  • रोपण एवं वनीकरण (Harvesting and Post-Harvest): कुशल रोपण के लिए ड्रोन का उपयोग करके खेतों और भूक्षेत्रों में समान रूप से बीज फैला सकते हैं। 
  • हार्वेस्टिंग एवं पोस्ट हार्वेस्ट (Harvesting and Post-Harvest): बेहतर गति और अधिक दक्षता के लिए ड्रोन्स के साथ कटाई की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित कर सकते हैं। सटीक और कुशल सहायता प्रदान करके ड्रोन्स हानि को न्यूनतम करने में सहायक हैं।
  • पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी तंत्र निगरानी (Environmental and Ecosystem Monitoring): हवाई ड्रोन्स के माध्यम से वनों और वन्यजीव आबादी का विस्तृत सर्वेक्षण कर सकते हैं।
खेती में ड्रोन को बढ़ावा दे रही सरकार
भारतीय कृषि की सूरत बदलने और कृषि क्षेत्र को तकनीकी रूप से सशक्त बनाकर किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ड्रोन की खरीद पर सब्सिडी दे रही है। बैंक आसान ऋण उपलब्ध करा रहे हैं। साथ ही, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) से जुड़े संस्थान एवं कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विभाग प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं जागरूकता अभियान चला रहे हैं, ताकि ड्रोन के उपयोग को बढ़ावा दिया जा सके। कृषि क्षेत्र में, एक नए गैजेट के रूप में ये ड्रोन किसानों की सदियों पुरानी चुनौतियों को आसान बना रहे हैं।

AIF योजना के तहत ऋण सुविधा
  • ऋण सीमा: 2 करोड़ रुपये तक 
  • 7 साल तक के लिए ऋण, 3% ब्याज सब्सिडी
  • CGTMSE के तहत संपार्श्विक-मुक्त ऋण
SMAM योजना के तहत सब्सिडी दे रही सरकार 
  • व्यक्तिगत किसानों के लिए 40-50% सब्सिडी (₹4 लाख तक)
  • एससी/एसटी/महिला किसानों के लिए बढ़ी हुई सब्सिडी (50% तक)
  • कृषि स्नातकों और सीएचसी के लिए 50% सब्सिडी
नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत ड्रोन को बढ़ावा
भारत सरकार ने नमो ड्रोन दीदी योजना शुरू की है। इसके तहत, ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को सशक्त बनाने वाले महिला स्वयं सहायता समूहों के लिए ड्रोन सुलभ कराए जा रहे हैं। नमो ड्रोन दीदी स्वयं सहायता समूहों द्वारा खरीदे गए कृषि ड्रोन की लागत के 80% पर सब्सिडी प्रदान कर रही है। इस योजना का लक्ष्य 2026 तक प्रशिक्षित और सहायता करने के लिए 15,000 महिला-नेतृत्व वाले समूहों का चयन करना है।